Skip to main content

Posts

Showing posts from April, 2022

गरिमा लाडो सेवा समिति ' बनी असहाय का सहारा ..

'गरिमा लाडो सेवा समिति ' बनी असहाय का सहारा ... सामाजिक कार्य करने से मिलता हैं मन को सकूंन : जनवी धाकड़ नई दिल्ली। समाज सेवा एक पुण्य कार्य हैं, इसके कारण लोग अमर हो जाते है तथा उन्हें सदियों तक याद भी किया जाता हैं. बड़ी से बड़ी सामाजिक बुराई को समाज सेवा रुपी हथियार की मदद से दूर किया जा सकता हैं.गोस्वामी तुलसीदास ने बहुत ही सुंदर पंक्ति लिखी हैं। कि ' परहित सरिस धर्म नहीं भाई '(अर्थात दूसरों की भलाई से बढ़कर कोई भी धर्म नहीं हैं) हरियाणा के जिला हिसार में कर्ण सिंह के 17 सितंबर सन 1988 में आंगन किलकारी से गूंज उठा। बिटियां ने जन्म लिया। जिसका नाम जनवी धाकड़ रखा। क्षेत्र में खुशी का बड़ा माहौल था। जबकि उस समय में बेटी के जन्म पर तरह - तरह के तानने - कसे (कमेंट) सुनने को मिलते थे। लेकिन ऐसा कुछ भी नही हुआ। कर्ण सिंह पशु - पालन विभाग में कार्यरत थे। जानवी धाकड़ को अच्छे से पालन पोषण हुआ। जानवी धाकड़ किसी परिचय की मोहताज नही हैं, समाज ने जो प्यार और आशीर्वाद दिया हैं। उसको भुलाया नही जा सकता। सेवा के साथ - साथ फ़िल्म दुनिया के माध्यम से समाज को प्रेरित करती हैं। ' जान...

रुक नहीं रहा है थाना कोतवाली क्षेत्र में अवैध सट्टे एवं जुए का कारोबार

सुमन नेगी उर्फ शब्बो की ' धाकड़ हीरोइन ' फ़िल्म की शूटिंग हुई ख़त्म जल्द होगी रिलीज ...

सुमन नेगी उर्फ शब्बो की ' धाकड़ हीरोइन ' फ़िल्म की शूटिंग हुई ख़त्म जल्द होगी रिलीज ... फ़िल्म जॉर्नलिज्म का हिस्सा : पत्रकार वसीम मंसूरी मुज़फ़्फ़रनगर। किरन प्रोडक्शन प्रा. लि० बैनर तले बन रही फिल्म '' धाकड़ हीरोइन'' तथा ' रूह ' की शूटिंग हुई पूरी ईद पर रिलीज होगी। लव स्टोरी , रोमांस , एक्शन , हँसी मजाक का तड़का लगा हैं। फ़िल्म की शूटिंग दिल्ली , नोएडा , गाजियाबाद, मेरठ , मुज़फ़्फ़रनगर , हापुड़ आदि क्षेत्र में हुई। समाज को बहेतर बनाने के लिए फ़िल्म ' रूह ' , ' धाकड़ हीरोइन ' की कहानी को भूपेंद्र तितोरिया ने अपनी पैनी धारदार कलम से लिखी जो समाज को बढ़ी बुराइयों को काट सके। दोनों फिल्मों की कहानी बड़ी ही रोमांचक हैं। बताया कि गत दिनों फ़िल्म ' वैक्सीन लगाओ , कोरोना भगाओ ' को महाराष्ट्र के राज्यपाल ने राजभवन में सम्मानित किया हैं। फिल्मों के माध्यम से समाज मे सरकार की नीतियों व सामाजिक सन्देश पहुँचना हैं। फ़िल्म को सजाने - सवारने में की गुफ्तगू में लगे रहते हैं ,सैकड़ो फिल्मों का डेरेक्शन करने वाले धर्मेश जेटली किसी भी परिचय के महोतज नही हैं। बत...