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एक अनियंत्रित कलम पत्रकारिता के मूल उद्देश्य में बाधा उत्पन्न करती है

 एक अनियंत्रित कलम पत्रकारिता के मूल उद्देश्य में बाधा उत्पन्न करती है




l पुरानी पत्रकारिता में सीधा-सपाट तथ्यों का प्रस्तुतीकरण कर निष्पक्षता को बनाए रखने का प्रयास होता था जबकि वर्तमान पत्रकारिता जिसके अंतर्गत पारदर्शिता  और  बहस (वाद-विवाद) के मुद्दे में एक पक्ष का समर्थन कर निष्पक्षता को प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है। हिन्दी का अखबार ' उदन्त मार्तण्ड‘ ऐसे समय में प्रकाशित हुआ था, जब हिन्दी भाषियों को अपनी भाषा के पत्र की आवश्यकता महसूस हो रही थी। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर ‘उदन्त मार्तण्ड‘ का प्रकाशन किया गया था।हिन्दी पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले पं. जुगल किशोर ने तब शायद कल्पना भी नहीं की होगी कि हिन्दी पत्रकारिता  का जो पौधा उन्होंने रोपा है, वह एक दिन विशाल वटवृक्ष बन जाएगा। वर्तमान में शांत पत्रकारिता की उपयोगिता को हमें समझना होगा।।एक गलत जानकारी समाज की दिशा को बदलने में सक्षम है इसलिए पत्रकारिता का उद्देश्य गलत जानकारी को सही जानकारी में परिवर्तित कर साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत करना होना चाहिए। जब कोई कलमकार अपनी कलम चलाता है और उसे शब्दों का रूप देता है तो उसकी भावनाएं निष्पक्ष, साक्ष्य आधारित होनी चाहिए।। पत्रकारिता के वर्तमान दौर में पीत पत्रकारिता जिसमें सही समाचारों की उपेक्षा करके सनसनी फैलाने वाले समाचार या ध्यान-खींचने वाले शीर्षकों का बहुतायत में प्रयोग किया जाता है,यह कहीं ना कहीं पाठकों को किसी जगह या व्यक्ति के प्रति एक खास तरह की सोच बनाने का प्रयास करती है और यह पत्रकारिता के वर्तमान दौर में चुनौती भी है अंत में मैं यही कहना चाहूंगा निष्पक्ष लिखें, निर्भीक होकर लिखें और कलम की ताकत को समझें। एक कलमकार ही अपने कलम की ताकत से सच्चाई को देश के सामने प्रस्तुत करता है। अंत में सभी को हिन्दी पत्रकारिता दिवस की शुभकामनाएं। सभी कलमकार और मीडिया से संबंधित व्यक्ति ऐसा लिखें जो वर्तमान पत्रकारिता को सकारात्मक दिशा की तरफ ले जाए और मुझे एक अभाव हिन्दी पत्रकारिता में शब्दों के चयन को लेकर महसूस होता है वह अभाव हिन्दी पत्रकारिता जरूर दूर करेगी ऐसी मेरी आशा है।।                                  --अक्षय कुमार वत्स( बीएससी ऑनर्स रसायन विज्ञान ,बीटीसी, एमएससी रसायन विज्ञान )✍🏼✍🏼✍🏼✍🏼✍🏼✍🏼✍🏼✍🏼✍🏼✍🏼✍🏼✍🏼

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