*खाद्यय विभाग मुजफ्फरनगर दे रहा है अवैध पशु कटान एवं गौकशी को बढ़ावा*
*बिना मानक पूरे किये सुविधा शुल्क लेकर जारी किए जा रहे हैं मीट की दुकान के लाइसेंस
खाद्यय विभाग मुजफ्फरनगर मीट लाइसेंस के लिए जो मानक हैं उन्हें पूरे किए बिना सुविधा शुल्क लेकर मीट बेचने की दुकान के लाइसेंस जारी कर रहा है जिससे अवैध कटान एवं गोकशी को बढ़ावा मिल रहा है।
*ऐसे लोगों के लाइसेंस जारी कर दिए गए हैं।जिनके परिवार के ऊपर गौकशी के दर्जनों मुकदमे दर्ज है।*
लाइसेंस के मानकों के अनुसार मीट की दुकान मिश्रित आबादी में न हो।और मीट की दुकान के आस पास कोई धार्मिक स्थल न हो।लेकिन खाद्यय विभाग मुजफ्फरनगर ने लाइसेंस जारी करते वक्त लाइसेंस के इन मानको कीअनदेखी कर सुविधा शुल्क के लालच में मीट की दुकान के लाइसेंस जारी कर दिए।मीट की दुकानो का धार्मिक स्थल एवं मिश्रित आबादी के पास होना सामाजिक एवं धार्मिक लिहाज से कतई भी ठीक नहीं है।इन तथ्यों को अनदेखा कर खाद्यय विभाग मुजफ्फरनगर के द्वारा मीट की दुकान के लाइसेंस जारी कर दिए गए हैं।जिससे अवैध पशु कटान एवं गौकशी को बढ़ावा मिल रहा है ।
क्योंकि लाइसेंस की आड़ में मीट के ये तश्कर अवैध रूप से पशु कटान कर रहे हैं।
सुजड़ू गांव में एवं सुजड़ू चुंगी पर दिन में सड़कों पर जो गौवंश के पशु दिन में सड़कों पर दिखाई देते हैं।वो अगले दिन सड़क पर नही दिखाई देते ।क्योंकि मीट के तश्कर रात में इनको पकड़ कर ले जाते हैं और इनको काट कर इनका मांस अपनी लाइसेंसी दुकान पर बेचते हैं।
इन मीट की दुकानों पर लाइसेंस के मानक के अनुसार न तो फ्रिज हैं और न ही मानक के अनुसार साफ सफाई के उद्देश्य से दुकान के अन्दर पत्थर या टाइल्स लगी हुई है।और न ही इनका जी एस टी रजिस्ट्रेशन है।फिर भी खाद्यय विभाग के द्वारा मोटा सुविधा शुल्क प्राप्त कर लाइसेंस जारी किए गए हैं।मिश्रित आबादी व धार्मिक स्थल के पास मीट की दुकानों का होना सामाजिक एवं धार्मिक स्तर से ठीक नहीं है।
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