श्रीराम पाॅलीटैक्निक काॅलेज में ष्ष्परिचयष्ष् कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ श्रीराम गु्रप आॅफ काॅलेजेज़ के चेयरमैन डाॅ0 एस0सी0 कुलश्रेष्ठ, काॅलेज अध्यक्ष डाॅ0 एन0जी0 मजूमदार, प्रधानाचार्य, श्रीराम पाॅलीटैक्निक, अश्वनी कुमार द्वारा द्वीप प्रज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नवागंतुक विद्यार्थियों को महाविद्याालय से परिचय कराने के साथ-साथ पाठ्यक्रम के सम्बन्ध में जानकारी देने, प्लेसमेन्ट, काॅलेज की अनुशासन प्रणाली तथा काॅलेज के नियमों से अवगत कराना था।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डाॅ0 एस0सी0 कुलश्रेष्ठ ने विद्यार्थियों के साथ अपने महत्वपूर्ण विचारों को साझा किया। उन्होने कहा कि व्यक्तित्व विकास के लिए सकारात्मक सोच की जरूरत है, नकारात्मक सोच मनुष्य के व्यक्तित्व के विकास को बाधित करती है। जिस कारण व्यक्ति का विकास रूक जाता है। उन्होने बताया कि आन्तरिक व्यक्तित्व का सुन्दर और सुदृढ होना जीवन में सफलता प्राप्ति के लिए आवश्यक है। वही बाह्य व्यक्तित्व भी उतना ही महत्वपूर्ण एवं सुन्दर होना चाहिए, जितना कि आन्तरिक व्यक्तित्व का सुन्दर होना। उन्होने कहा कि सफल इंजीनियर वही है जो मन में उठने वाली जिज्ञासा को कार्यशाला में मूर्त रूप देकर कोई नया आविष्कार करता हैं तथा विषम परिस्थितियों और कम उपकरणों की उपस्थित में भी अपना कार्य पूर्ण से कर सकता हैं। सफलता प्राप्ति के लिए समय प्रबन्धन करना अति-आवश्यक है। समय प्रबन्धन से ही बडे से बडे लक्ष्य को आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। सिर्फ जीवन में यह जज्बा बनाये रखने की जरूरत है कि असफलताओं से निराश न हो, बल्कि असफलताऐं मनुष्य को सफलता के मार्ग तक ले जाने में सहायक है। उन्होने कहा कि मनुष्य रोज सीखता है और यह सीखने की प्रक्रिया जीवन पर्यन्त जारी रहनी चाहिए।
इस अवसर पर पाॅलीटैक्निक के प्रधानाचार्य अश्वनी कुमार ने कहा कि हमारी प्राथमिकता विद्यार्थियों को बेहतर तकनीकी शिक्षा देना है जिससे वे देश और समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सके।
कार्यक्रम को सफल बनाने में फिरोज़ अली, कृष्णा गोपाल, स्नेहलता गर्ग, छवि, नेहा शर्मा, शुभम गुप्ता, नितिन गुप्ता, जोनी कुमार, नितिश कुमार, नितिन कुमार आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
अंत में काॅलेज अध्यक्ष डाॅ0 एन0जी0 मजूमदार ने विद्यार्थियों को जीवन में सफल होने के लिए गुरुमंत्र देने हेतु काॅलेज चेयरमैन डाॅ0 एस0सी0 कुलश्रेष्ठ का धन्यवाद दिया।
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