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जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के 50 दिन पूरे लेकिन सब को है 27 सितंबर का इंतजार

*जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के 50 दिन पूरे लेकिन सब को है 27 सितंबर का इंतजार* 



जम्मू कश्मीर के हालात ऐसे हैं दुकानदार हो स्थानीय पत्रकार हो होटल में काम करने वाले हो या फिर कस्बों दूर गांव में आम लोगों से सवाल पूछे तो जवाब मिलेगा कि देखते हैं 27 सितंबर के बाद क्या होता है आपको बताते चलें कि 27 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र जनरल एसेंबली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इमरान खान के भाषण होने हैं अफवाहों से भरे कश्मीर में 1 वर्ग को लगता है कि शायद भारत 27 सितंबर के बाद अनुच्छेद 370 को वापस बहाल कर दें कुछ को आशंका है कि पाकिस्तान की ओर से हमला होगा कुछ को लगता है कि 27 सितंबर के बाद चरमपंथी हमले होंगे कुछ को यह लगता है कि कश्मीर आजाद हो जाएगा और कुछ का मानना है कि 27 सितंबर के बाद सब कुछ ठीक हो जाएगा इन अफवाहों का क्या आधार है यह साफ नहीं कहा जा सकता है बता दें कि 5 अगस्त को जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा वापस ले लिया गया था राज्य को दो हिस्सों में बांटा गया इंटरनेट और मोबाइल सुविधा काट दी गई इस बात को 50 दिन हो चुके हैं लेकिन लोगों में इस फैसले पर गम गुस्सा दुविधा अनिश्चितता डर बना हुआ है सब कुछ ठीक है बताने वाली भारतीय मीडिया को लोग झूठा बता रहे हैं जो सच नहीं दिखाता कश्मीर में पिछले 50 दिन कैसे गुजरे यह तो यहां के निवासी ही समझ सकते हैं शिक्षा व्यापार न्याय व्यवस्था छोटे उद्योग खाद सामानों की कीमतें ट्रांसपोर्ट की आवाजाही एक्सपोर्ट इंडस्ट्री कश्मीर में सरकारी फैसले पर जारी हड़ताल में जिंदगी के हर पहलू को प्रभावित किया है दुकानें बंद हैं बिजनेस ठप है हजारों होटल खाली है चिकारा और हाउसबोट खाली है डल झील और सड़कों से पर्यटक नदारद सड़कों पर सुरक्षाकर्मी बड़ी संख्या में तैनात हैं और ज्यादातर लोग अपने घर में बंद हैं कनेक्टिविटी न होने की वजह से लोग अपने रिश्तेदारों साथियों काम करने वालों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं मोबाइल फोन का इस्तेमाल टाइम देखने और वीडियो गेम खेलने के लिए हो रहा है कमाई और रोटी के बिना कश्मीरी आखिर कैसे जिएंगे खासकर जिस तरह व्यापार ठप है एक उदाहरण है शोपिया से दुनिया भर की मंडियों में पहुंचने वाले मशहूर सेब जो पेड़ पर लटके हैं क्योंकि कोई उन्हें उतारने को तैयार नहीं है कुछ किसान सेव लेकर मंडियों में पहुंच रहे हैं लेकिन छुप छुप कर डर है कि कहीं चरमपंथी या फिर हड़ताल समर्थक हमला न कर दे सोपिया में मंडी कोल्ड स्टोरेज बंद है मंडी के एक व्यापारी का कहना है कि पिछले साल सोपिया मंडी का कुल कारोबार 1400 करोड रुपए का था और घाटी में सेब का सालाना व्यापार 3000 करोड रुपए का है और 10 अक्टूबर तक सेव को नहीं तोड़ा गया तो फसल बेकार होनी शुरू हो जाएगी इसी सेब व्यापार से लोगों के सपने पूरे होते हैं परिवारों की साल भर की रोजी रोटी चलती है सरकार का कहना है कि इंटरनेट और मोबाइल सेवा बंद करने का मकसद लोगों की जान बचाना है क्योंकि इससे चरमपंथियों के हैंडलर उनके संपर्क में नहीं है श्रीनगर में ट्रांसपोर्ट सड़क पर थोड़ा वापस लौटा है सुबह और शाम कुछ दुकानें खुलती हैं कभी-कभी लोग बंद दुकानों के बाहर ग्राहकों का इंतजार करते हैं और ग्राहक आने पर दुकान के अंदर चले जाते हैं लोगों में चरमपंथी और हड़ताल समर्थकों के हमले का डर बंद का मुख्य कारण है सूत्रों के मुताबिक 27 सितंबर को यूएन में कोई बड़ी घोषणा का अनुमान लगाया जा रहा है इस तरह से लोग अपने आम जनजीवन को स्थगित किए हुए हैं और 27 सितंबर का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं



 


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